Adla Badli, Sanyog Ya Saajish – Episode 10


अपने पढ़ा था, पायल के बाद मैं भी चेलेंज के पहले लेवल के तहत अपने मम्मो की मसाज करवा चुकी थी और झड़ते झड़ते बची. आगे इस देसी चुदाई कहानी में क्या क्या होगा? पढ़िए और जानिए..
वो तीनो तारीफ़ करते हुए मेरे लिए भी ताली बजाने लगे. अपनी हालत मैं ही जानती थी. मुझे उनकी तालिया सुनाई दे रही थी पर मैं कुछ सेकण्ड्स तक वही पड़ी रही.
उन लोगो ने भी मेरी हालत देखते हुए मुझे थोड़ा समय दिया. पति ने नीचे पड़ा मेरा स्लीप शर्ट लाकर मेरे सीने पर रख दिया.
मैं अब उठी और अपना शर्ट अपने सीने से दबाये रखे मम्मे छुपा दिए. मैं अपना सर अविश्वास में हिलाने लगी.
मैं: “ये क्या था यार. तुम तीनो मिलकर तो मेरे पीछे ही पड़ गए. मुझे बाँध कर रख दिया. हिलने भी नहीं दिया. और इस बदमाश पायल ने तो वो कपडा ही हटा दिया.”
मैंने अब शर्ट पहन कर बटन बंद कर दिए.
पायल: “कैसा लगा ये बता. मजा आया कि नहीं?”
मैं: “बहुत खतरनाक था, पूछो मत.”
डीपू: “सही में माहौल बहुत गरम हो गया था.”
अशोक: “बधाई हो, तुम दोनों ही पास हो गए. दोनों संस्कारी हो और इच्छाशक्ति काफी मजबुत हैं”
पायल : “यार, लेवल वन की छाती की मसाज से ये हालत हैं, तो सोचो अगर हमने लेवल टू की योनी मसाज भी प्लान किया होता तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल होता. तुमने अपनी हालत देखी थी, मैंने तो सोचा था कि तुम मुझसे भी ज्यादा कंट्रोल कर पाओगी.”
मैं: “नाम भी मत लो लेवल टू का.”
पायल “क्या हुआ फट गयी तुम्हारी लेवल वन से ही.”
डीपू : “अरे, इस तरह की बात मत करो. शब्दों का ध्यान रखो.”
पायल : “देखो, हमारा प्रश्न अभी भी वही का वही हैं. संस्कार की क्षमता कितनी हैं. अभी हमने सिर्फ एक तिहाई क्षमता पायी हैं.”
अशोक: “एक तिहाई कैसे? दो में से एक लेवल पार किया तो पचास प्रतिशत हुआ न.”
पायल: “असल में तीन लेवल हैं. मैंने सिर्फ दो ही बताये थे क्यों कि दोनों मसाज से जुड़े थे.”
अशोक: “तो तीसरा लेवल क्या हैं? दूसरे से भी खतरनाक हैं क्या?”
पायल: “जब हम दूसरा लेवल ही नहीं कर रहे तो तीसरे के बारे में बोलने से भी क्या फायदा.”
डीपू: “तुम्हे ट्राय करना हैं क्या दूसरा लेवल?”
पायल: “पहले के बाद मुझे डाउट हैं कि मैं दूसरा कर भी पाउंगी. क्या बोलती हो प्रतिमा?”
मैं: “मुझे अपनी इच्छाशक्ति पर यकीन हैं कि मैं कोई भी चेलेंज पूरा कर सकती हूँ. मैं ये कर सकती हूँ पर करुँगी नहीं. मुझे ये ठीक नहीं लगता.”
पायल : “कर सकती हूँ और कर लिया में बहुत फर्क होता हैं. या तो आप बोलो मत या फिर करके दिखाओ.”
अशोक: “प्लीज पायल, इसकी इच्छा नहीं हैं तो फाॅर्स मत करो.”
पायल: “मैं कहा फाॅर्स कर रही हूँ. मैं तो बस इतना कह रही हूँ कि या तो बोलो मत या फिर करो.”
डीपू “हम मर्दो को चेलेंज दिया होता तो अब तक हम लेटे हुए होते. हा हा हा, क्या बोलते हो अशोक”.
अशोक: “मगर इनकी तरह इतना टिक नहीं पाते.”
डीपू: “बात ये नहीं हैं कि आप मुकाबला जीतते हो या नहीं, बात हैं मुकाबले में उतरने की हिम्मत. मैंने थोड़ी देर पहले ही कहा था कि लड़किया थोड़ी डरपोक होती हैं.”
मैं: “मैंने तब भी कहा था मैं तुम्हारी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखती.”
पायल: “ठीक हैं, मैं रेडी हूँ लेवल दो के लिए. मगर मेरे नीचे वहां पर कपड़ा ढक कर रखना होगा. और प्रतिमा मुझसे बदला लेने के लिए कपडा हटा मत देना.”
मैं: “मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ. वैसे भी अगर मैंने कपडा हटाया तो मेरा नंबर आएगा तब तुम भी मुझे थोड़े ही छोड़ोगी.”
पायल “तुम्हारा नंबर ! मतलब तुम भी रेडी हो लेवल दो के लिए? क्या बात हैं.”
मैं: “नहीं ऐसा नहीं हैं. मेरे मुँह से निकल गया था.”
पायल: “हां , दिल की बात जुबान पर आ ही गयी.”
अशोक: “चलो पिछली बार की तरह सबकी वोटिंग कर लेते हैं लेवल टू के लिए.”
पायल: “मैं रेडी हूँ पर कपड़ा ढकना पड़ेगा.”
डीपू: “औरतो की हिम्मत की दाद देने के लिए, पायल के लिए मेरी हां.”
अशोक: “मुझे नहीं पता मैं कर पाऊंगा या नहीं. पर कोशिश कर सकता हूँ.”
मैं: “मैं सिर्फ पायल को हारते देखना चाहूंगी इसलिए हां.”
पायल: “अब प्रतिमा के लिए वोटिंग करते हैं”
मैं: “पहले तुम्हारा हो जाने दो फिर देखते हैं.”
पायल: “नहीं, अब ये नहीं चलेगा. मेरा हो जायेगा और फिर तुम मना कर दोगी, तो मैं ना इधर की रहूंगी ना उधर की.”
डीपू : “फेयर पॉइंट हैं. या तो दोनों ही मत करो या करो तो दोनों करो”.
अशोक: “सही हैं, एक लड़की को हम अकेला नहीं छोड़ सकते. अब ओर कोई वोटिंग नहीं होगी. प्रतिमा का हां मतलब दोनों लड़कियों की हां और ना मतलब दोनों की ना.”
मैं थोड़ा सोच में पड़ गयी. सारा दारमदार अब मेरे निर्णय पर था. मैंने अपने पति से नजरे मिलाते हुए आँखों से सवाल पूछा.
अशोक: “मैं अपना निर्णय तुम पर थोपना नहीं चाहता. हम घूमने आये हैं. बस कोई किसी से नाराज होकर न जाये. ख़ुशी ख़ुशी जाए. इसलिए सिर्फ तुम्हारा निर्णय होगा.”
मैं: “ठीक हैं, मैं भी रेडी हूँ. पर रूल पहले से बना लो, वरना पायल पहले की तरह चीटिंग करेगी.”
पायल “मोहब्बत और जंग में सब कुछ जायज हैं. पर क्यों कि चेलेंज मसाज का हैं तो सेक्स छोड़ कर कुछ भी कर सकते हैं उकसाने के लिए. वो ढकने के लिए दुपट्टा याद रखना.”
डीपू: “ठीक हैं मैडम, तो आप ही लेवल टू की शुरुआत करो.”
पायल: “प्रतिमा का लेवल वन देख कर मेरी गीली हो गयी हैं. पहले मैं साफ़ करके आती हूँ.”
पायल अब बाथरूम में चली गयी और थोड़ी देर बाद वापिस आयी. उसके चेहरे पर लेवल टू का तनाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था.
डीपू: “बेस्ट ऑफ़ लक, किला फतह कर आना.”
पायल: “थैंक यू. अगर मेरे बाद प्रतिमा ने चेलेंज करने से मना कर दिया तो? मना करने के लिए कोई सजा भी तो होनी चाहिए.”
अशोक: “सभी लोग अपनी मर्जी से कर रहे हैं. ना करने पर सजा का क्या मतलब.”
मैं: “अरे बोला ना, मैं कर लुंगी. पर फिर भी यकीन नहीं तो जो तुम बोलो वो सजा.”
अशोक: “सजा पहले ही लिख लो वरना बाद में कोई बढ़ा चढ़ा सकता हैं.”
पायल ने नोट पैड लिया और छुपा के एक सजा लिख दी. फिर वो कागज़ फोल्ड कर अपने पर्स में डाल दिया.
फिर पायल आकर अब बिस्तर के बीच बैठ गयी. उसके एक तरफ डीपू था तो दुरी तरफ मैं थी. अशोक उसके पांवो की तरफ बैठे थे.
पायल: “अरे मैं कपडा लाना भूल गयी नीचे से ढकने के लिए.”
मैंने उसी का पहले वाला पारदर्शी सफ़ेद कपड़ा संभाल कर रखा था.
मैं: “ये रहा कपड़ा, अब लेट जाओ मैं लगा देती हूँ.”
पायल अब लेट गयी. डीपू अपने मोबाइल के स्टॉप टाइमर के साथ तैयार था. मैंने पायल के कमर से जांघो तक के हिस्से को उस कपड़े से ढक दिया.
अशोक: “पायल रेडी?”
पायल: “उम्म, हां रेडी.”
अशोक: “ठीक हैं मैं अब तुम्हारा पाजामा निकाल रहा हूँ साथ में अंदर के कपड़े भी.”
अशोक ने उस ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल का पाजामा उसकी पैंटी सहित नीचे की तरफ खींचने लगा.
मैंने वो ऊपर का कपड़ा पकडे रखा ताकि पाजामा के साथ वो भी नीचे ना खिसक जाए. अशोक ने अब पायल के नीचे के कपड़े उसकी टांगो से पुरे बाहर निकाल दिए.
उस पारदर्शी कपडे से पायल का कमर से नीचे का पूरा जिस्म दिखाई दे रहा था. मैंने देखा कि पायल की चूत के ऊपर की तरफ काफी घने बाल थे.
वो इतनी आलसी होगी कि अपने नीचे के बाल भी साफ़ नहीं कर पाती, ये नहीं पता था मुझे. फिर सोचा शायद इसी वजह से उसने कपड़े से ढकने की मांग रखी थी. ताकि उसकी ये गन्दगी और आलसीपन बाहर ना आ जाये.
डीपू: “अशोक और पायल दोनों रेडी हो?”
पायल और अशोक: “हां रेडी.”
डीपू: “तुम्हारे दस मिनट शुरू होते हैं, थ्री, टू वन एन्ड गो.”
अशोक ने ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल के चूत के ऊपर के बालो में अपनी एक ऊँगली घुमाने लगा. पायल अपनी सांस रोके बैठी थी.
अब अशोक अपनी ऊँगली फिराते हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगा. उसकी ऊँगली अब चूत की दरार के ऊपर थी और फिर दरार में प्रवेश करते बाहरी दीवारों पर ऊपर नीचे रगड़ खाने लगी.
पायल की हलकी हलकी सिसकिया निकलने लगी. अशोक अब उसी दरार में ऊँगली ऊपर नीचे करता रहा और पायल उसी गति से सिसकिया निकाल रही थी. अशोक को अब कुछ ओर ज्यादा कोशिश करनी थी. शुरू के दो तीन मिनट बर्बाद हो चुके थे.
अशोक ने अब अपनी ऊँगली पायल की चूत के छेद पर रख दी और ऊँगली का थोड़ा ही हिस्सा अंदर बाहर कर रहा था. छेद में थोड़ी ऊँगली जाने से पायल की सिसकियाँ थोड़ी बढ़ गयी थी. अशोक ने उत्साहित होकर अब पूरी ऊँगली अंदर घुसा दी.
इससे पायल के मुँह से एक जोर की आह निकली. फिर तो अशोक नहीं रुका और अपनी ऊँगली धीमे गति से अंदर बाहर करने लगा.
पायल : “आह , नहीं अशोक अह्ह्हह्ह्ह्ह अम्म्मम्म अशोक क्या कर रहे हो. उम्म ओ माँ ना हम्म हम्म ऐसे मत करो अशोक अह्ह्ह्हह्ह.”
आधा समय बीत चूका था. मुझे पायल से बदला लेना था उसने लेवल वन में, मेरा ढका कपडा निकाल फेंका था. अगर मैं अभी उसका ढका कपड़ा निकालती हूँ तो उसकी वो बालों वाली चूत सबको दिख जाएगी और वो बहुत शर्मिंदा होगी.
वैसे भी मैं निकालू या ना, वो तो मेरा निकाल ही देगी. मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, मेरी चूत तो एकदम सफाचट थी. अच्छा ही हैं हम दोनों की सफाई की तुलना हो जाएगी.
अगर मैं एकदम से कपडा निकालती तो दोनों मर्दो को ये लगता कि मैं लम्पट हूँ. इसलिए मुझे कुछ चालाकी से ये काम करना था.
मेरे पास प्लान था. मैंने कपडे को सही से ढकने के लिए अपना हाथ पायल के दूसरी तरफ ले गयी और कपडा उसकी जांघो पर से सही करने लगी. वापस हाथ खींचते वक्त मैंने जानबूझ कर थोड़ा कपडा अपनी उंगलियो के बीच फंसा लिया.
जैसे ही मैंने अपना हाथ वापिस खिंचा, शरीर से पूरा हट गया. पायल की बालों भरी चूत सबके सामने खुल गयी.
शर्म के मारे पायल का पूरा चेहरा लाल हो गया. पायल चिल्लाने लगी और अशोक भी रुक गया.
पायल: “मुझे पता हैं तुमने ये जानबूझ कर किया हैं.”
मैं: “अरे गलती से हुआ, अच्छा ले ले, मैं वापिस ढक देती हूँ कपड़ा.”
पायल: “अब क्या फायदा कपडे का, सब तो दिख गया, नहीं चाहिए मुझे. अब तुम देखो, मैं तो तुम्हे कपडा लगाने ही नहीं दूंगी.”
मैं: “मैं तो वैसे भी कपड़ा लगाने ही नहीं वाली थी.”
पायल: “बहुत चालु हैं प्रतिमा. अपनी भौसड़ी साफ़ करके आयी होगी इस लिए उछल रही हो.”
डीपू: “शीईईईइ गंदे शब्दों का इस्तेमाल मत करो प्लीज.”
मैं: “चलो शुरू करते हैं फिर, टाइमर थोड़ा पीछे करो अगर रोका ना हो तो.”
डीपू: “नहीं, मैंने रोक दिया था. अशोक रेडी गो.”
पायल के चिल्लाने से अशोक भी थोड़ा डर गया तो वो धीरे धीरे पायल की चूत के बाहर हाथ फेरता रहा.
मैं: “अशोक क्या कर रहे हो, अच्छे से करो ना. जल्दी जल्दी करो.”
पायल: “कुछ भी कर लो मैं जीत के ही रहूंगी.”
मैं: “अच्छा ये देखो.”
मैंने आगे बढ़कर उसका टैंक टॉप उसके कमर से ऊपर कर उसके मम्मो से उठाते हुए सर से पूरा बाहर निकाल कर उसको पूरी नंगी कर दिया.
पायल को पूरा नंगी देख अशोक की भी आँखें खुल गयी. उसने पायल के पाँव चौड़े किये और उसकी कमर के पास आकर बैठ गया. उसने अपना हाथ पायल की चूत पर रखा और तीव्र गति से ऊपर नीचे ऊपर नीचे रगड़ने लगा.
सिर्फ दो मिनट बचे थे, तो उसके हाथ एकदम मशीन की भांति चलने लगे. इतने जोर के झटके लग रहे थे कि पायल के मोटे मम्मे बुरी तरह से हिल ढुल रहे थे जैसे भूकंप आ गया हो.
पायल: “आह आह आह आह आह ना ना ना अशोक, ओह्ह्ह मेरी भौसड़ी जल रही हैं अशोक छोडो ओह माँ मेरा हो रहा हैं, हो रहा हैं, अशोक मेरी चूत, हाह हाह उम्म उम्म उम्म उम्म, आह आ अह्ह्हह्ह्ह्ह हो गया मेरा.”
अशोक ने उसको छोड़ दिया. पायल हांफ रही थी जैसे अभी अभी मैराथन दौड़ कर आयी थी.
डीपू: “सिर्फ दस सेकंड ही बचे थे, हार जीत का अंतर. मगर फिर से काफी अच्छे से खिंचा तुमने. मेरी अंडरवियर गीली कर दी तुमने तो.”
अशोक: “मेरे तो हाथ पैर अभी तक कांप रहे थे. मैं हाथ धो कर आता हूँ, पुरे गंदे हो गए.”
पायल अभी भी बिना कपड़ो के बेसुध लेटी हुई थी.
मैंने और डीपू ने उसको उसके कपडे और कुछ पेपर नैपकिन दिए सफाई के लिए. उसने सफाई करके के बाद अपने कपडे पहन लिया. तब तक अशोक भी हाथ धोकर आ गये.
पायल: “देखो मेरे हाथ पैर अभी तक कांप रहे हैं. और प्रतिमा तुमने मुझे लाइफ में पहली बार सबके सामने नंगी कर दिया. तुमसे तो मैं अपना बदला लेकर रहूंगी.”
सच पूछो तो मैं बुरी तरह से डर गयी थी. पता नहीं वो क्या हरकत करेगी. पायल अब डीपू के कान में कुछ फुसफुसाने लगी. डीपू ने अपना सर ना में हिलाया.
डीपू :”पागल हो क्या, ये बहुत ज्यादा हो जाएगा.”
पायल: “ये भी मसाज में ही आता हैं, रूल के हिसाब से चलेगा.”
अशोक: “मेरी बीवी के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हो तुम. कुछ उलटा सीधा तो नहीं कर रहे?”
पायल: “सब कुछ रूल्स के अंतर्गत ही होगा, चिंता मत करो.”
मैं: “मुझे पायल पे भरोसा नहीं. मुझे नहीं करना अब.”
पायल: “मुझे पता था ये धोखा देगी. सोच लो, अगर नहीं किया तो सजा मिलेगी.”
मैं: “तुम जो करने वाली हो उससे तो वो सजा ही ठीक होगी. लाओ क्या सजा हैं.”
पायल ने अपना पर्स खोला और चिठ्ठी मुझे देते हुई बोली “सिर्फ तुम पढ़ना और फिर निर्णय लो कि लेवल टू करना हैं या सजा भुगतनी हैं.”
पायल के बाद मैं भी चेलेंज के पहले लेवल के तहत अपने मम्मो की मसाज करवा चुकी थी और झड़ते झड़ते बची.
विराट ने कैसे अपनी सगी सगी भाभी की चुदाई करी और उनको अपने लंड को महोताज बनाया, यह जानिए उसकी देसी चुदाई कहानी में उसी की जुबानी.
वो तीनो तारीफ़ करते हुए मेरे लिए भी ताली बजाने लगे. अपनी हालत मैं ही जानती थी. मुझे उनकी तालिया सुनाई दे रही थी पर मैं कुछ सेकण्ड्स तक वही पड़ी रही.
उन लोगो ने भी मेरी हालत देखते हुए मुझे थोड़ा समय दिया. पति ने नीचे पड़ा मेरा स्लीप शर्ट लाकर मेरे सीने पर रख दिया.
मैं अब उठी और अपना शर्ट अपने सीने से दबाये रखे मम्मे छुपा दिए. मैं अपना सर अविश्वास में हिलाने लगी.
मैं: “ये क्या था यार. तुम तीनो मिलकर तो मेरे पीछे ही पड़ गए. मुझे बाँध कर रख दिया. हिलने भी नहीं दिया. और इस बदमाश पायल ने तो वो कपडा ही हटा दिया.”
मैंने अब शर्ट पहन कर बटन बंद कर दिए.
पायल: “कैसा लगा ये बता. मजा आया कि नहीं?”
मैं: “बहुत खतरनाक था, पूछो मत.”
डीपू: “सही में माहौल बहुत गरम हो गया था.”
अशोक: “बधाई हो, तुम दोनों ही पास हो गए. दोनों संस्कारी हो और इच्छाशक्ति काफी मजबुत हैं”
पायल : “यार, लेवल वन की छाती की मसाज से ये हालत हैं, तो सोचो अगर हमने लेवल टू की योनी मसाज भी प्लान किया होता तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल होता. तुमने अपनी हालत देखी थी, मैंने तो सोचा था कि तुम मुझसे भी ज्यादा कंट्रोल कर पाओगी.”
मैं: “नाम भी मत लो लेवल टू का.”
पायल “क्या हुआ फट गयी तुम्हारी लेवल वन से ही.”
डीपू : “अरे, इस तरह की बात मत करो. शब्दों का ध्यान रखो.”
पायल : “देखो, हमारा प्रश्न अभी भी वही का वही हैं. संस्कार की क्षमता कितनी हैं. अभी हमने सिर्फ एक तिहाई क्षमता पायी हैं.”
अशोक: “एक तिहाई कैसे? दो में से एक लेवल पार किया तो पचास प्रतिशत हुआ न.”
पायल: “असल में तीन लेवल हैं. मैंने सिर्फ दो ही बताये थे क्यों कि दोनों मसाज से जुड़े थे.”
अशोक: “तो तीसरा लेवल क्या हैं? दूसरे से भी खतरनाक हैं क्या?”
पायल: “जब हम दूसरा लेवल ही नहीं कर रहे तो तीसरे के बारे में बोलने से भी क्या फायदा.”
डीपू: “तुम्हे ट्राय करना हैं क्या दूसरा लेवल?”
पायल: “पहले के बाद मुझे डाउट हैं कि मैं दूसरा कर भी पाउंगी. क्या बोलती हो प्रतिमा?”
मैं: “मुझे अपनी इच्छाशक्ति पर यकीन हैं कि मैं कोई भी चेलेंज पूरा कर सकती हूँ. मैं ये कर सकती हूँ पर करुँगी नहीं. मुझे ये ठीक नहीं लगता.”
पायल : “कर सकती हूँ और कर लिया में बहुत फर्क होता हैं. या तो आप बोलो मत या फिर करके दिखाओ.”
अशोक: “प्लीज पायल, इसकी इच्छा नहीं हैं तो फाॅर्स मत करो.”
पायल: “मैं कहा फाॅर्स कर रही हूँ. मैं तो बस इतना कह रही हूँ कि या तो बोलो मत या फिर करो.”
डीपू “हम मर्दो को चेलेंज दिया होता तो अब तक हम लेटे हुए होते. हा हा हा, क्या बोलते हो अशोक”.
अशोक: “मगर इनकी तरह इतना टिक नहीं पाते.”
डीपू: “बात ये नहीं हैं कि आप मुकाबला जीतते हो या नहीं, बात हैं मुकाबले में उतरने की हिम्मत. मैंने थोड़ी देर पहले ही कहा था कि लड़किया थोड़ी डरपोक होती हैं.”
मैं: “मैंने तब भी कहा था मैं तुम्हारी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखती.”
पायल: “ठीक हैं, मैं रेडी हूँ लेवल दो के लिए. मगर मेरे नीचे वहां पर कपड़ा ढक कर रखना होगा. और प्रतिमा मुझसे बदला लेने के लिए कपडा हटा मत देना.”
मैं: “मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ. वैसे भी अगर मैंने कपडा हटाया तो मेरा नंबर आएगा तब तुम भी मुझे थोड़े ही छोड़ोगी.”
पायल “तुम्हारा नंबर ! मतलब तुम भी रेडी हो लेवल दो के लिए? क्या बात हैं.”
मैं: “नहीं ऐसा नहीं हैं. मेरे मुँह से निकल गया था.”
पायल: “हां , दिल की बात जुबान पर आ ही गयी.”
अशोक: “चलो पिछली बार की तरह सबकी वोटिंग कर लेते हैं लेवल टू के लिए.”
पायल: “मैं रेडी हूँ पर कपड़ा ढकना पड़ेगा.”
डीपू: “औरतो की हिम्मत की दाद देने के लिए, पायल के लिए मेरी हां.”
अशोक: “मुझे नहीं पता मैं कर पाऊंगा या नहीं. पर कोशिश कर सकता हूँ.”
मैं: “मैं सिर्फ पायल को हारते देखना चाहूंगी इसलिए हां.”
पायल: “अब प्रतिमा के लिए वोटिंग करते हैं”
मैं: “पहले तुम्हारा हो जाने दो फिर देखते हैं.”
पायल: “नहीं, अब ये नहीं चलेगा. मेरा हो जायेगा और फिर तुम मना कर दोगी, तो मैं ना इधर की रहूंगी ना उधर की.”
डीपू : “फेयर पॉइंट हैं. या तो दोनों ही मत करो या करो तो दोनों करो”.
अशोक: “सही हैं, एक लड़की को हम अकेला नहीं छोड़ सकते. अब ओर कोई वोटिंग नहीं होगी. प्रतिमा का हां मतलब दोनों लड़कियों की हां और ना मतलब दोनों की ना.”
मैं थोड़ा सोच में पड़ गयी. सारा दारमदार अब मेरे निर्णय पर था. मैंने अपने पति से नजरे मिलाते हुए आँखों से सवाल पूछा.
अशोक: “मैं अपना निर्णय तुम पर थोपना नहीं चाहता. हम घूमने आये हैं. बस कोई किसी से नाराज होकर न जाये. ख़ुशी ख़ुशी जाए. इसलिए सिर्फ तुम्हारा निर्णय होगा.”
मैं: “ठीक हैं, मैं भी रेडी हूँ. पर रूल पहले से बना लो, वरना पायल पहले की तरह चीटिंग करेगी.”
पायल “मोहब्बत और जंग में सब कुछ जायज हैं. पर क्यों कि चेलेंज मसाज का हैं तो सेक्स छोड़ कर कुछ भी कर सकते हैं उकसाने के लिए. वो ढकने के लिए दुपट्टा याद रखना.”
डीपू: “ठीक हैं मैडम, तो आप ही लेवल टू की शुरुआत करो.”
पायल: “प्रतिमा का लेवल वन देख कर मेरी गीली हो गयी हैं. पहले मैं साफ़ करके आती हूँ.”
पायल अब बाथरूम में चली गयी और थोड़ी देर बाद वापिस आयी. उसके चेहरे पर लेवल टू का तनाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था.
डीपू: “बेस्ट ऑफ़ लक, किला फतह कर आना.”
पायल: “थैंक यू. अगर मेरे बाद प्रतिमा ने चेलेंज करने से मना कर दिया तो? मना करने के लिए कोई सजा भी तो होनी चाहिए.”
अशोक: “सभी लोग अपनी मर्जी से कर रहे हैं. ना करने पर सजा का क्या मतलब.”
मैं: “अरे बोला ना, मैं कर लुंगी. पर फिर भी यकीन नहीं तो जो तुम बोलो वो सजा.”
अशोक: “सजा पहले ही लिख लो वरना बाद में कोई बढ़ा चढ़ा सकता हैं.”
पायल ने नोट पैड लिया और छुपा के एक सजा लिख दी. फिर वो कागज़ फोल्ड कर अपने पर्स में डाल दिया.
फिर पायल आकर अब बिस्तर के बीच बैठ गयी. उसके एक तरफ डीपू था तो दुरी तरफ मैं थी. अशोक उसके पांवो की तरफ बैठे थे.
पायल: “अरे मैं कपडा लाना भूल गयी नीचे से ढकने के लिए.”
मैंने उसी का पहले वाला पारदर्शी सफ़ेद कपड़ा संभाल कर रखा था.
मैं: “ये रहा कपड़ा, अब लेट जाओ मैं लगा देती हूँ.”
पायल अब लेट गयी. डीपू अपने मोबाइल के स्टॉप टाइमर के साथ तैयार था. मैंने पायल के कमर से जांघो तक के हिस्से को उस कपड़े से ढक दिया.
अशोक: “पायल रेडी?”
पायल: “उम्म, हां रेडी.”
अशोक: “ठीक हैं मैं अब तुम्हारा पाजामा निकाल रहा हूँ साथ में अंदर के कपड़े भी.”
अशोक ने उस ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल का पाजामा उसकी पैंटी सहित नीचे की तरफ खींचने लगा.
मैंने वो ऊपर का कपड़ा पकडे रखा ताकि पाजामा के साथ वो भी नीचे ना खिसक जाए. अशोक ने अब पायल के नीचे के कपड़े उसकी टांगो से पुरे बाहर निकाल दिए.
उस पारदर्शी कपडे से पायल का कमर से नीचे का पूरा जिस्म दिखाई दे रहा था. मैंने देखा कि पायल की चूत के ऊपर की तरफ काफी घने बाल थे.
वो इतनी आलसी होगी कि अपने नीचे के बाल भी साफ़ नहीं कर पाती, ये नहीं पता था मुझे. फिर सोचा शायद इसी वजह से उसने कपड़े से ढकने की मांग रखी थी. ताकि उसकी ये गन्दगी और आलसीपन बाहर ना आ जाये.
डीपू: “अशोक और पायल दोनों रेडी हो?”
पायल और अशोक: “हां रेडी.”
डीपू: “तुम्हारे दस मिनट शुरू होते हैं, थ्री, टू वन एन्ड गो.”
अशोक ने ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल के चूत के ऊपर के बालो में अपनी एक ऊँगली घुमाने लगा. पायल अपनी सांस रोके बैठी थी.
अब अशोक अपनी ऊँगली फिराते हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगा. उसकी ऊँगली अब चूत की दरार के ऊपर थी और फिर दरार में प्रवेश करते बाहरी दीवारों पर ऊपर नीचे रगड़ खाने लगी.
पायल की हलकी हलकी सिसकिया निकलने लगी. अशोक अब उसी दरार में ऊँगली ऊपर नीचे करता रहा और पायल उसी गति से सिसकिया निकाल रही थी. अशोक को अब कुछ ओर ज्यादा कोशिश करनी थी. शुरू के दो तीन मिनट बर्बाद हो चुके थे.
अशोक ने अब अपनी ऊँगली पायल की चूत के छेद पर रख दी और ऊँगली का थोड़ा ही हिस्सा अंदर बाहर कर रहा था. छेद में थोड़ी ऊँगली जाने से पायल की सिसकियाँ थोड़ी बढ़ गयी थी. अशोक ने उत्साहित होकर अब पूरी ऊँगली अंदर घुसा दी.
इससे पायल के मुँह से एक जोर की आह निकली. फिर तो अशोक नहीं रुका और अपनी ऊँगली धीमे गति से अंदर बाहर करने लगा.
पायल : “आह , नहीं अशोक अह्ह्हह्ह्ह्ह अम्म्मम्म अशोक क्या कर रहे हो. उम्म ओ माँ ना हम्म हम्म ऐसे मत करो अशोक अह्ह्ह्हह्ह.”
आधा समय बीत चूका था. मुझे पायल से बदला लेना था उसने लेवल वन में, मेरा ढका कपडा निकाल फेंका था. अगर मैं अभी उसका ढका कपड़ा निकालती हूँ तो उसकी वो बालों वाली चूत सबको दिख जाएगी और वो बहुत शर्मिंदा होगी.
वैसे भी मैं निकालू या ना, वो तो मेरा निकाल ही देगी. मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, मेरी चूत तो एकदम सफाचट थी. अच्छा ही हैं हम दोनों की सफाई की तुलना हो जाएगी.
अगर मैं एकदम से कपडा निकालती तो दोनों मर्दो को ये लगता कि मैं लम्पट हूँ. इसलिए मुझे कुछ चालाकी से ये काम करना था.
मेरे पास प्लान था. मैंने कपडे को सही से ढकने के लिए अपना हाथ पायल के दूसरी तरफ ले गयी और कपडा उसकी जांघो पर से सही करने लगी. वापस हाथ खींचते वक्त मैंने जानबूझ कर थोड़ा कपडा अपनी उंगलियो के बीच फंसा लिया.
जैसे ही मैंने अपना हाथ वापिस खिंचा, शरीर से पूरा हट गया. पायल की बालों भरी चूत सबके सामने खुल गयी.
शर्म के मारे पायल का पूरा चेहरा लाल हो गया. पायल चिल्लाने लगी और अशोक भी रुक गया.
पायल: “मुझे पता हैं तुमने ये जानबूझ कर किया हैं.”
मैं: “अरे गलती से हुआ, अच्छा ले ले, मैं वापिस ढक देती हूँ कपड़ा.”
पायल: “अब क्या फायदा कपडे का, सब तो दिख गया, नहीं चाहिए मुझे. अब तुम देखो, मैं तो तुम्हे कपडा लगाने ही नहीं दूंगी.”
मैं: “मैं तो वैसे भी कपड़ा लगाने ही नहीं वाली थी.”
पायल: “बहुत चालु हैं प्रतिमा. अपनी भौसड़ी साफ़ करके आयी होगी इस लिए उछल रही हो.”
डीपू: “शीईईईइ गंदे शब्दों का इस्तेमाल मत करो प्लीज.”
मैं: “चलो शुरू करते हैं फिर, टाइमर थोड़ा पीछे करो अगर रोका ना हो तो.”
डीपू: “नहीं, मैंने रोक दिया था. अशोक रेडी गो.”
पायल के चिल्लाने से अशोक भी थोड़ा डर गया तो वो धीरे धीरे पायल की चूत के बाहर हाथ फेरता रहा.
मैं: “अशोक क्या कर रहे हो, अच्छे से करो ना. जल्दी जल्दी करो.”
पायल: “कुछ भी कर लो मैं जीत के ही रहूंगी.”
मैं: “अच्छा ये देखो.”
मैंने आगे बढ़कर उसका टैंक टॉप उसके कमर से ऊपर कर उसके मम्मो से उठाते हुए सर से पूरा बाहर निकाल कर उसको पूरी नंगी कर दिया.
पायल को पूरा नंगी देख अशोक की भी आँखें खुल गयी. उसने पायल के पाँव चौड़े किये और उसकी कमर के पास आकर बैठ गया. उसने अपना हाथ पायल की चूत पर रखा और तीव्र गति से ऊपर नीचे ऊपर नीचे रगड़ने लगा.
सिर्फ दो मिनट बचे थे, तो उसके हाथ एकदम मशीन की भांति चलने लगे. इतने जोर के झटके लग रहे थे कि पायल के मोटे मम्मे बुरी तरह से हिल ढुल रहे थे जैसे भूकंप आ गया हो.
पायल: “आह आह आह आह आह ना ना ना अशोक, ओह्ह्ह मेरी भौसड़ी जल रही हैं अशोक छोडो ओह माँ मेरा हो रहा हैं, हो रहा हैं, अशोक मेरी चूत, हाह हाह उम्म उम्म उम्म उम्म, आह आ अह्ह्हह्ह्ह्ह हो गया मेरा.”
अशोक ने उसको छोड़ दिया. पायल हांफ रही थी जैसे अभी अभी मैराथन दौड़ कर आयी थी.
डीपू: “सिर्फ दस सेकंड ही बचे थे, हार जीत का अंतर. मगर फिर से काफी अच्छे से खिंचा तुमने. मेरी अंडरवियर गीली कर दी तुमने तो.”
अशोक: “मेरे तो हाथ पैर अभी तक कांप रहे थे. मैं हाथ धो कर आता हूँ, पुरे गंदे हो गए.”
पायल अभी भी बिना कपड़ो के बेसुध लेटी हुई थी.
मैंने और डीपू ने उसको उसके कपडे और कुछ पेपर नैपकिन दिए सफाई के लिए. उसने सफाई करके के बाद अपने कपडे पहन लिया. तब तक अशोक भी हाथ धोकर आ गये.
पायल: “देखो मेरे हाथ पैर अभी तक कांप रहे हैं. और प्रतिमा तुमने मुझे लाइफ में पहली बार सबके सामने नंगी कर दिया. तुमसे तो मैं अपना बदला लेकर रहूंगी.”
सच पूछो तो मैं बुरी तरह से डर गयी थी. पता नहीं वो क्या हरकत करेगी. पायल अब डीपू के कान में कुछ फुसफुसाने लगी. डीपू ने अपना सर ना में हिलाया.
डीपू :”पागल हो क्या, ये बहुत ज्यादा हो जाएगा.”
पायल: “ये भी मसाज में ही आता हैं, रूल के हिसाब से चलेगा.”
अशोक: “मेरी बीवी के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हो तुम. कुछ उलटा सीधा तो नहीं कर रहे?”
पायल: “सब कुछ रूल्स के अंतर्गत ही होगा, चिंता मत करो.”
मैं: “मुझे पायल पे भरोसा नहीं. मुझे नहीं करना अब.”
पायल: “मुझे पता था ये धोखा देगी. सोच लो, अगर नहीं किया तो सजा मिलेगी.”
मैं: “तुम जो करने वाली हो उससे तो वो सजा ही ठीक होगी. लाओ क्या सजा हैं.”
पायल ने अपना पर्स खोला और चिठ्ठी मुझे देते हुई बोली “सिर्फ तुम पढ़ना और फिर निर्णय लो कि लेवल टू करना हैं या सजा भुगतनी हैं.”
वो क्या सजा है जो उस पर्ची में लिखी है? ये जानिए इस देसी चुदाई कहानी के अगले एपिसोड में!

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